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मंगळवार, १८ ऑगस्ट २०२६
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मुंबई का कचरा नवी मुंबई के माथी? कोपरखैरणे में अवैध मलबे को साफ करने में महानगरपालिका ने पानी की तरह बहाए 'डेढ़ करोड़'!

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विशेष संवाददाता: जिथेश पटाथरी

नवी मुंबई :
गंदगी कोई और फैलाए और उसका भारी-भरकम खामियाजा आम जनता के टैक्स के पैसों से चलने वाली महानगरपालिका की तिजोरी को भुगतना पड़े, कुछ ऐसा ही हैरान करने वाला मामला नवी मुंबई में सामने आया है। कोपरखैरणे एमआयडीसी इलाके के दगडखाण परिसर में गैरकानूनी तरीके से लाकर डंप किए गए मलबे और गाद को हटाने के लिए नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC) को अपनी जेब से पूरे 1 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च करने पड़े हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि यह सारा कचरा मुंबई की मिठी नदी से लाकर यहां फेंके जाने का दावा किया गया है।

आखिर क्या है पूरा मामला?
मानसून की शुरुआत से ठीक पहले कोपरखैरणे एमआयडीसी की एक खदान के पास बड़े पैमाने पर मिट्टी और गाद का ढेर लग गया था। यह मलबा किसने और कहां से लाकर डाला, इसका पता चलता, उससे पहले ही बारिश ने जोर पकड़ लिया। भारी बारिश के चलते इस बेवारस गाद और कीचड़ का पानी पास के इंडस्ट्रियल एरिया में घुस गया, जिससे सीधे चार कारखानों में मिट्टी की परत जम गई और हड़कंप मच गया।

हालात बेकाबू होते देख NMMC के आपदा प्रबंधन विभाग को तुरंत मैदान में उतरना पड़ा। इमरजेंसी एक्शन के तहत इस गाद को हटाने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया गया, जिसका कुल खर्च सीधे डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

तिजोरी खाली, माफिया बेखौफ?
हाल ही में हुई स्थायी समिति की बैठक में यह मुद्दा गरमाया रहा। बाहर से आने वाले डंपर चालकों और अवैध डेब्रिज माफियाओं के काले कारोबार की वजह से नवी मुंबई के नागरिकों पर यह वित्तीय बोझ क्यों डाला जा रहा है, ऐसा तीखा सवाल पार्षदों ने उठाया। हालांकि पालिका ने इस मामले में कुछ गाड़ियों पर केस दर्ज करने और जांच टीमें बनाने की बात कही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि— इस डेढ़ करोड़ रुपये के भारी खर्च की वसूली उन बेखौफ माफियाओं की जेब से कब की जाएगी?

शहर को दीमक की तरह चाट रहे इस डंपर माफिया पर प्रशासन नकेल कसने में कब कामयाब होगा, इस पर अब पूरे शहर की नजरें टिकी हैं!

Kasalkar Insights

Sandeep Kasalkar's career is characterized by a relentless pursuit of journalistic excellence and a deep commitment to diverse storytelling. Whether through ground reporting, editorial leadership, or advocacy, he continues to make significant contributions to the media landscape. His multifaceted expertise and leadership are instrumental in shaping and advancing the field of journalism in India.

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